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श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन का समय, इतिहास और यात्रा गाइड 2026 | Shri Omkareshwar Jyotirlinga Guide

Omkareshwar Jyotirlinga Temple Madhya Pradesh Narmada River View - Sanatan Sankalp
🔱 श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग 🔱
नर्मदा तट पर 'ॐ' आकृति का पावन धाम

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के मध्य मांधाता पर्वत पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इस द्वीप का आकार प्राकृतिक रूप से 'ॐ' के समान है, जो इसे अत्यंत आध्यात्मिक और दिव्य बनाता है।

📊 मंदिर की मुख्य जानकारी (Quick Facts)

विवरण जानकारी
📍 स्थानमांधाता (ओंकारेश्वर), मध्य प्रदेश
🌊 पवित्र नदीनर्मदा एवं कावेरी का संगम
⛰️ पर्वतमांधाता पर्वत (ॐ आकृति)

🗓️ दर्शन और आरती का समय | Aarti Timings

मंगल आरतीप्रातः 05:00 – 05:30
भोग आरतीदोपहर 12:20 – 01:10
संध्या आरतीशाम 08:00 – 08:30
शयन आरतीरात 09:00 – 09:30

📜 पौराणिक कथा एवं इतिहास | History

शिव पुराण के अनुसार, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना के पीछे तीन प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं:

राजा मांधाता की तपस्या: इक्ष्वाकु वंश के राजा मांधाता ने यहाँ नर्मदा के तट पर स्थित पर्वत पर भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव प्रकट हुए और राजा की प्रार्थना पर लोक कल्याण के लिए यहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गए। उन्हीं के नाम पर इस पर्वत का नाम 'मांधाता पर्वत' पड़ा।

विंध्याचल पर्वत का गर्व: एक अन्य कथा के अनुसार, जब विंध्याचल पर्वत को अपने ऊँचे होने का अहंकार हो गया, तब नारद मुनि ने उन्हें बताया कि सुमेरु पर्वत उससे कहीं अधिक ऊँचा है। विंध्याचल ने अपना अहंकार त्याग कर यहाँ भगवान शिव की 'पार्थिव लिंग' बनाकर छह महीने तक कठोर आराधना की। शिव जी ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और देवताओं के अनुरोध पर दो स्वरूपों में विभाजित हो गए—एक ओंकारेश्वर (जो द्वीप पर है) और दूसरा ममलेश्वर (जो नर्मदा के दक्षिण तट पर है)।

देव-असुर संग्राम: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के युद्ध में देवताओं की हार होने लगी, तब देवताओं ने यहाँ भगवान शिव की प्रार्थना की थी। महादेव ने ओंकार के रूप में प्रकट होकर असुरों का विनाश किया और देवताओं को विजय दिलाई।

आज भी यहाँ नर्मदा नदी प्राकृतिक रूप से 'ॐ' की आकृति बनाती है, जो यह प्रमाणित करती है कि यह स्थान साक्षात महादेव का निवास स्थान है।

Mamleshwar Mahadev

🚩 ओंकारेश्वर के प्रमुख दर्शनीय स्थल

  • ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग: नर्मदा के दूसरे तट पर स्थित, जिसे ओंकारेश्वर का ही अभिन्न अंग माना जाता है।
  • नर्मदा घाट और संगम: जहाँ भक्त पवित्र स्नान करते हैं।
  • सिद्धनाथ मंदिर: मांधाता द्वीप पर स्थित एक अद्भुत प्राचीन वास्तुकला वाला मंदिर।
  • स्टैच्यू ऑफ वननेस (Statue of Oneness): आदि शंकराचार्य की विशाल और भव्य प्रतिमा।
  • कावेरी संगम: वह पावन स्थान जहाँ नर्मदा और कावेरी नदी का मिलाप होता है।
       
Mamleshwar Jyotirlinga Temple Omkareshwar MP - Sanatan Sankalp

🏨 कहाँ ठहरें? (Stay Options)

गजानन महाराज संस्थानठहरने के लिए सबसे उत्तम और स्वच्छ जगह।
M.P. Tourism होटलनर्मदा तट के पास प्रीमियम होटल्स और गेस्ट हाउस।

🗓️ 2 दिनों का यात्रा कार्यक्रम | Itinerary

दिन 1होटल चेक-इन, नर्मदा स्नान, मुख्य ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन और ममलेश्वर दर्शन।
दिन 2नर्मदा परिक्रमा (नाव या पैदल), आदि शंकराचार्य प्रतिमा दर्शन और नर्मदा आरती।

🚗 कैसे पहुँचें? (Travel Guide)

🛤️ रेल मार्ग निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन इंदौर (80 किमी) और खंडवा (70 किमी) हैं।
🛣️ सड़क मार्ग इंदौर, उज्जैन और खंडवा से नियमित बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं।
✈️ हवाई मार्ग निकटतम हवाई अड्डा देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट (इंदौर) है।

"ओङ्कारममलेश्वरं प्रथमं प्रभासं च द्वितीयकं स्मृतम् ।
ओंकारममलेश्वरं नमामि तं ओंकारेश्वरं शरणं प्रपद्ये ॥"

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॥ हर हर महादेव ॥

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2 Comments

  1. नर्मदे हर

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  2. जय श्री ओंकारेश्वर

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ॐ नमः शिवाय