Advertisement

नित्य देव पूजन विधि – रोज़ की पूजा के मंत्र | Daily Dev Poojan Vidhi – Lyrics and Steps Guide

नित्य देव पूजन विधि – रोज़ की पूजा के मंत्र लिरिक्स

🙏 नित्य देव पूजन की सरल विधि 🙏
घर के मंदिर में प्रतिदिन पूजा करने का सही तरीका (घर में पूजा कैसे करें)

सनातन धर्म में दैनिक पूजा का विशेष महत्व है। घर के मंदिर में नियमित रूप से दीपक जलाने और देवी-देवताओं का स्मरण करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यहाँ हम आपको बहुत ही सरल और प्रभावी नित्य पूजन विधि बता रहे हैं जिसे आप अपने व्यस्त जीवन में भी अपना सकते हैं।

शुद्ध अंतःकरण से की गई पूजा हमारे जीवन में न केवल सकारात्मकता लाती है, बल्कि हमारी इच्छाशक्ति में भी वृद्धि करती है और हमारा मन भगवान से गहराई से जुड़ जाता है।

उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त या प्रातः काल
प्रमुख सामग्री शुद्ध जल, दीपक, अक्षत, पुष्प, धूप, चंदन, रोली
पूजा दिशा पूर्व या उत्तर

📜 पूजन के मुख्य चरण

  1. पवित्रीकरण: शुद्ध वस्त्र धारण कर आसन पर बैठें तथा इस मंत्र का उच्चारण करते हुए अपने ऊपर जल छिड़कें।
    ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
    यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
    ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु। 
  2. आचमन: दाहिने हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।
    ॐ केशवाय नमः
    ॐ नारायणाय नमः
    ॐ माधवाय नमः
    ॐ हृषीकेशाय नमः
  3. दीप प्रज्वलन: दीपक जलाकर प्रणाम करें।
    शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा।
    शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
  4. गणेश स्मरण: पूजा का आरंभ गणपति स्मरण से करें।
    गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थजम्बूफलसार भक्षितम्।
    उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम्॥
  5. इष्ट देव स्मरण: अपने इष्ट देव का ध्यान करें।
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
  6. स्नान व अर्घ्य: शुद्ध जल अर्पित करें।
    गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।
    नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
  7. तिलक व अक्षत: चंदन, रोली व अक्षत अर्पित करें।
    स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।
    स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
    स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।
    स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥
  8. धूप-पुष्प: धूप व पुष्प अर्पित करें।
    आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्
  9. नैवेद्य: फल, मिश्री या दूध अर्पित करें।
    त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये।
  10. आरती : कपूर से आरती करें।
    कर्पूर गौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
    सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
  11. समापन: क्षमा याचना करें।
    आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
    पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

    मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर।
    यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥

💡 विशेष सुझाव (Sanatan Sankalp)

यदि आपके पास समय कम हो, तो केवल पंचोपचार पूजन (गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य) करना भी पर्याप्त और शास्त्रसम्मत माना गया है। भाव सबसे महत्वपूर्ण है! 

 यदि समय केवल 2–3 मिनट का हो, तो प्रातः या रात्रि में शांत मन से यह करें:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमः शिवाय
ॐ गं गणपतये नमः

(तीनों में से कोई एक मंत्र भी पर्याप्त है)

क्या आप इस सरल विधि का पालन करेंगे?

कमेंट में "ॐ नमः शिवाय" लिखें और हमें बताएं कि आप अगली पूजा विधि किस पर चाहते हैं!

संत कबीर दास जी का अमृत वचन 

दुःख में सिमरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सिमरन करे, तो दुःख काहे को होय॥

संत कबीर दास

"त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥"

॥ जय श्री कृष्ण ॥ 🕉️

Post a Comment

1 Comments

ॐ नमः शिवाय