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द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्: अर्थ और महत्व सहित | Dwadash Jyotirlinga Stotram in Hindi

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् और 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम - Sanatan Sankalp
🕉️ द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् 🕉️

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् भगवान शिव के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों की स्तुति में रचित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। इसका नियमित पाठ करने से भक्तों के पाप नष्ट होते हैं, संकट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के स्वयं-प्रकाशित स्वरूप हैं, जो भारत के विभिन्न पवित्र स्थानों पर स्थित हैं।


🔱 1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग🔱

सौराष्ट्रे देशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् ।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: सौराष्ट्र की पवित्र भूमि में स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के उस प्रकाशमय स्वरूप का स्मरण कराता है, जहाँ वे चन्द्रमा को अपने शीश पर धारण कर भक्तों को करुणा और भक्ति का वरदान प्रदान करते हैं।

🔱 2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग🔱

श्रीशैल शृङ्गे विहितावतारं श्री मल्लिकार्जुनमिदं नमामि ।
भक्तानुकम्पाय सदा विराजं तं मल्लिकार्जुनं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: श्रीशैल पर्वत पर विराजमान मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग शिव–शक्ति के संयुक्त स्वरूप का प्रतीक है, जहाँ भगवान शिव भक्तों की अनुकम्पा के लिए सदा जाग्रत रहते हैं।

🔱 3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 🔱

अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदं च सदा जनानाम् ।
महाकालं भुवनैकनाथं तं महाकालं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: अवन्तिका नगरी में स्थित महाकालेश्वर भगवान शिव के उस स्वरूप को दर्शाता है जो स्वयं काल के भी अधिपति हैं और अपने भक्तों को मुक्तिदान प्रदान करते हैं।

🔱 4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग🔱

अमलेश्वरं पर्वतराजकन्यां ओंकाररूपं शिवमेकनाथम् ।
श्री ओंकारेश्वरमिदं नमामि तं ओंकारेश्वरं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के ओंकार स्वरूप का स्मरण कराता है, जहाँ सम्पूर्ण सृष्टि का मूल नाद ‘ॐ’ दिव्य रूप में प्रतिष्ठित है।

🔱 5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग🔱

हिमालये पर्वतराजमध्ये निशामये तुङ्गहिमालये च ।
केदाररूपं शिवमेकनाथं तं केदारनाथं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: हिमालय की दिव्य गोद में स्थित केदारनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के तपस्वी और योगमय स्वरूप का परिचायक है, जहाँ वे साधकों पर अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं।

🔱 6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग🔱

दक्षिणाम्नाये विहितावतारं भीमाशङ्करं भुवनैकनाथम् ।
भक्तानुकम्पाय सदा विराजं तं भीमाशङ्करं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: दक्षिण दिशा में स्थित भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के उस रूप को प्रकट करता है जो भक्तों के भय और संकटों का नाश करने वाले हैं।

🔱 7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग🔱

काश्यां विराजं करुणानिधानं विश्वेश्वरं भक्तजनप्रियं च ।
विश्वं धरन्तं शिवमेकनाथं तं विश्वनाथं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: काशी में विराजमान विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग करुणा के सागर भगवान शिव का प्रतीक है, जहाँ उनकी उपस्थिति मात्र से जीव को परम शांति का अनुभव होता है।

🔱 8. त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग🔱

गोदावरीतीरविहाररूपं त्र्यम्बकं शंकरमेकनाथम् ।
भक्तानुकम्पाय सदा विराजं तं त्र्यम्बकेश्वरं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: गोदावरी तट पर स्थित त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के त्रिनेत्र स्वरूप को प्रकट करता है, जो तीनों कालों में व्याप्त होकर भक्तों की रक्षा करते हैं।

🔱 9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग🔱

वैद्यनाथं करुणानिधानं रोगापहारं शिवमेकनाथम् ।
श्री वैद्यनाथं शरणं प्रपद्ये तं वैद्यनाथं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के करुणामय चिकित्सक स्वरूप को दर्शाता है, जहाँ वे भक्तों के शारीरिक और मानसिक कष्टों का शमन करते हैं।

🔱 10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग🔱

सौराष्ट्रदेशे विहितावतारं नागेश्वरं भक्तजनप्रियं च ।
भक्तानुकम्पाय सदा विराजं तं नागेश्वरं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के उस तेजस्वी रूप का स्मरण कराता है जो नागों से भूषित होकर सृष्टि की रक्षा करते हैं।

🔱 11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग🔱

सेतुस्थले तीरविहाररूपं रामेश्वरं भक्तजनप्रियं च ।
भक्तानुकम्पाय सदा विराजं तं रामेश्वरं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: सेतु क्षेत्र में स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के उस स्वरूप को दर्शाता है जहाँ वे अपने भक्तों की पूजा को सहर्ष स्वीकार करते हैं।

🔱 12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग🔱

एलापुरे रम्यवनस्थितं च घृष्णेश्वरं भक्तजनप्रियं च ।
भक्तानुकम्पाय सदा विराजं तं घृष्णेश्वरं शरणं प्रपद्ये ॥

भावार्थ: एलापुर में विराजमान घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की भक्तवत्सलता को प्रकट करता है, जहाँ वे सच्ची भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।


ज्योतिर्मयद्वादशलिङ्गकानां शिवात्मनां प्रोक्तमिदं क्रमेण ।
स्तोत्रं पठित्वा मनुजोऽतिभक्त्या फलं तदालोक्य निजं भजेच्च ॥13

॥ इति द्वादश ज्योतिर्लिङ्गस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

✨ स्तोत्र का महत्व (Importance)

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों का दिव्य स्तवन है। इसका नियमित पाठ करने से:

  • समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।
  • मानसिक शांति प्राप्त होती है और रोगों का नाश होता है।
  • शिव कृपा एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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ॐ नमः शिवाय