🕉️ एकबिल्वं शिवार्पणम् 🕉️
द्वादश ज्योतिर्लिंगों की भक्तिमय स्तुति
इस स्तुति में सोमनाथ से लेकर घृष्णेश्वर तक सभी बारह ज्योतिर्लिंगों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया है। अंत में बिल्वपत्र के मूल, मध्य और अग्रभाग में ब्रह्मा, विष्णु और शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए उसे भगवान शिव को समर्पित किया गया है।
सोमनाथं प्रणमाम्यहम्, कोटि कोटि नमस्कारम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: मैं भगवान सोमनाथ को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ और उन्हें करोड़ों बार नमन करता हूँ। यह एक बिल्वपत्र मैं भगवान शिव को समर्पित करता हूँ।
मल्लिकार्जुन देवेशं, भक्तवत्सल शङ्करम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: भक्तों पर स्नेह रखने वाले देवों के देव भगवान मल्लिकार्जुन शंकर को मैं प्रणाम करता हूँ और यह एक बिल्वपत्र उन्हें अर्पित करता हूँ।
महाकालं महातेजं, कालकालं नमाम्यहम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: महान तेज से प्रकाशित भगवान महाकाल, जो स्वयं काल के भी काल हैं, मैं उन्हें नमन करता हूँ और एक बिल्वपत्र शिवजी को समर्पित करता हूँ।
ॐकारेश्वरं ईशानं, प्रणवस्वरूपमीश्वरम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: ॐकारस्वरूप, परम ईश्वर और समस्त दिशाओं के स्वामी भगवान ॐकारेश्वर को मैं प्रणाम करता हूँ और यह एक बिल्वपत्र अर्पित करता हूँ।
केदारेशं हिमाधीशं, मोक्षद्वारं नमाम्यहम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: हिमालय के अधिपति और मोक्ष के द्वार माने जाने वाले भगवान केदारनाथ को मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ और एक बिल्वपत्र शिव को समर्पित करता हूँ।
भीमशङ्कर देवेशं, दैत्यसंहारकारकम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: देवों के देव भगवान भीमशंकर, जो दुष्ट शक्तियों और दैत्यों का संहार करने वाले हैं, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ और एक बिल्वपत्र अर्पित करता हूँ।
काशीविश्वनाथेशं, विश्वनाथं नमाम्यहम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: काशी के स्वामी और समस्त विश्व के नाथ भगवान विश्वनाथ को मैं श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ और एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित करता हूँ।
त्र्यम्बकेश्वर देवेशं, गौतमीतीरवासिनम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: गौतमी अर्थात गोदावरी नदी के तट पर विराजमान देवों के देव भगवान त्र्यम्बकेश्वर को मैं नमन करता हूँ और एक बिल्वपत्र उन्हें समर्पित करता हूँ।
वैद्यनाथं दयासिन्धुं, रोगदुःखविनाशकम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: करुणा के सागर और रोग तथा दुखों का नाश करने वाले भगवान वैद्यनाथ को मैं श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ और एक बिल्वपत्र अर्पित करता हूँ।
नागेश्वरं महादेवं, नागभूषण भूषितम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: नागों को आभूषण के रूप में धारण करने वाले महादेव भगवान नागेश्वर को मैं प्रणाम करता हूँ और एक बिल्वपत्र उन्हें समर्पित करता हूँ।
रामेश्वरं रघुनाथार्च्यं, सेतुबन्धप्रकाशकम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: भगवान श्रीराम द्वारा पूजित और रामसेतु की पवित्र स्मृति से जुड़े भगवान रामेश्वर को मैं नमन करता हूँ और एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित करता हूँ।
घृष्णेशं करुणासिन्धुं, भक्ताभीष्टप्रदायकम्
एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: करुणा के सागर और अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले भगवान घृष्णेश्वर को मैं श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ और एक बिल्वपत्र अर्पित करता हूँ।
द्वादश ज्योतिर्लिंगेशं, सर्वलोकैकनायकम्
भक्तिभावसमायुक्तं, एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: बारहों ज्योतिर्लिंगों के अधिपति और समस्त लोकों के एकमात्र नायक भगवान शिव को मैं भक्तिभाव से नमन करता हूँ और यह एक बिल्वपत्र उन्हें समर्पित करता हूँ।
मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्ये विष्णुरूपिणे
अग्रतः शिवरूपाय एकबिल्वं शिवार्पणम्
अर्थ: बिल्वपत्र के मूल भाग में ब्रह्मा का स्वरूप, मध्य भाग में भगवान विष्णु का स्वरूप और अग्रभाग में भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। ऐसे पवित्र बिल्वपत्र को मैं श्रद्धा और भक्तिभाव से भगवान शिव को समर्पित करता हूँ।
🌿 बिल्वपत्र का महत्व
सनातन परंपरा में बिल्वपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पित करना भगवान शिव की आराधना का एक महत्वपूर्ण अंग है। बिल्वपत्र की तीन पत्तियाँ भगवान शिव के त्रिनेत्र, त्रिशूल तथा सृष्टि के तीन गुणों की स्मृति कराती हैं।
बिल्वपत्र अर्पित करते समय सबसे महत्वपूर्ण भावना श्रद्धा और भक्ति की होती है। भक्त अपने मन के अहंकार, नकारात्मकता और विकारों को भी भगवान शिव के चरणों में समर्पित करने का भाव रखता है।
🔱 द्वादश ज्योतिर्लिंगों का स्मरण
इस स्तुति में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों का स्मरण किया गया है:
- सोमनाथ
- मल्लिकार्जुन
- महाकालेश्वर
- ॐकारेश्वर
- केदारनाथ
- भीमाशंकर
- काशी विश्वनाथ
- त्र्यंबकेश्वर
- वैद्यनाथ
- नागेश्वर
- रामेश्वर
- घृष्णेश्वर
🕉️ एकबिल्वं शिवार्पणम् का भाव
इस स्तुति का मूल भाव है कि भक्त अपने हृदय की श्रद्धा भगवान शिव को अर्पित करे। एक छोटा सा बिल्वपत्र भी जब सच्ची भक्ति, श्रद्धा और समर्पण के साथ शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है, तो वह भक्त के लिए प्रेम और समर्पण का प्रतीक बन जाता है।
“एकबिल्वं शिवार्पणम्” केवल बिल्वपत्र अर्पित करने का भाव नहीं है, बल्कि अपने मन, कर्म और जीवन को भी भगवान शिव के चरणों में समर्पित करने की सुंदर आध्यात्मिक भावना है।
🙏 पाठ एवं पूजन का शुभ समय
- प्रातःकाल स्नान के बाद
- सोमवार के दिन
- प्रदोष काल में
- महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर
- शिवलिंग के समक्ष दीप प्रज्वलित करके
- बिल्वपत्र अर्पित करते समय श्रद्धापूर्वक
🔱 शिव भक्ति का सरल मंत्र
ॐ नमः शिवाय
हर हर महादेव 🙏
शिवं शान्तं जगन्नाथं, भक्तानामभयप्रदम्।
भगवान भोलेनाथ सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें।
🕉️ हर हर महादेव 🕉️
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ॐ नमः शिवाय