🚩 श्री राम स्तुति 🚩
(गोस्वामी तुलसीदास कृत 'विनय पत्रिका' से)
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम् ।
नवकंज लोचन, कंज मुख, कर कंज, पद कंजारुणम् ॥ १ ॥
कंदर्प अगणित अमित छवि, नवनील नीरद सुन्दरम् ।
पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम् ॥ २ ॥
भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश निकन्दनम् ।
रघुनंद आनंदकंद कोशलचंद दशरथ नन्दनम् ॥ ३ ॥
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम् ।
आजानुभुज शर चाप धर, संग्राम जित खर-दूषणम् ॥ ४ ॥
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम् ।
मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम् ॥ ५ ॥
मनु जाहि राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर सांवरो ।
करुणा निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥ ६ ॥
एहि भाँति गौरी असीस सुनि सिय सहित हिय हरषीं अली ।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली ॥ ७ ॥
॥ सोरठा ॥
जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ॥ ८ ॥
॥ इति श्री गोस्वामी तुलसीदास विरचिता श्री रामस्तुतिः सम्पूर्णा ॥
🙏 प्रभु की महिमा :
"श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन" स्तुति का पाठ करने से मन को अपार शांति मिलती है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। आप अपनी श्रद्धा नीचे कमेंट बॉक्स में "जय श्री राम" लिखकर व्यक्त कर सकते हैं!
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1 Comments
Jai shree ram
ReplyDeleteॐ नमः शिवाय