हिंदू कैलेंडर, जिसे पंचांग कहा जाता है, केवल तारीखें बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह खगोलीय गणना और आध्यात्मिक विज्ञान का अद्भुत संगम है। आइए जानते हैं इसके मुख्य अंगों के बारे में हिंदू पंचांग भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। यह केवल तिथियों का कैलेंडर नहीं, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का मार्गदर्शक है। जन्म से लेकर विवाह, व्रत, त्योहार, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों तक—हर कार्य का निर्धारण पंचांग के आधार पर किया जाता है। “पंचांग” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—पंच (पाँच) और अंग (भाग)। अर्थात् पंचांग के पाँच मुख्य अंग होते हैं:
1. तिथि 2. वार 3. नक्षत्र 4. योग 5. करण , इन्हीं पाँच अंगों के आधार पर दिन की शुभता-अशुभता, व्रत-त्योहार और मुहूर्त तय किए जाते हैं।
तिथि – चंद्रमा की गति के अनुसार तिथि निर्धारित होती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, जिन्हें शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में बाँटा जाता है।
वार – सप्ताह के सात दिन (रविवार से शनिवार) वार कहलाते हैं, जिनका संबंध विभिन्न ग्रहों से होता है।
योग – सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त स्थिति से योग बनते हैं। कुल 27 योग माने गए हैं।
करण – तिथि के आधे भाग को करण कहा जाता है। शुभ-अशुभ कार्यों में करण का विशेष विचार किया जाता है।
🌓 दो अयन (Ayan)
एक वर्ष में दो अयन होते हैं, जो सूर्य की स्थिति पर आधारित हैं:
- उत्तरायण: सूर्य का मकर राशि में प्रवेश। यह देवताओं का दिन माना जाता है।
- दक्षिणायन: सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश। यह देवताओं की रात्रि मानी जाती है।
🌸 छह ऋतुएं (Ritu)
| ऋतु का नाम | हिंदी महीने |
|---|---|
| वसन्त ऋतु | चैत्र - वैशाख |
| ग्रीष्म ऋतु | ज्येष्ठ - आषाढ़ |
| वर्षा ऋतु | श्रावण - भाद्रपद |
| शरद ऋतु | आश्विन - कार्तिक |
| हेमन्त ऋतु | मार्गशीर्ष - पौष |
| शिशिर ऋतु | माघ - फाल्गुन |
🌗 पक्ष और तिथियां
| तिथियां (क्रम) | शुक्ल पक्ष (बढ़ता चांद) | कृष्ण पक्ष (घटता चांद) |
|---|---|---|
| 1 - 5 | प्रतिपदा से पंचमी | प्रतिपदा से पंचमी |
| 6 - 10 | षष्ठी से दशमी | षष्ठी से दशमी |
| 11 - 14 | एकादशी से चतुर्दशी | एकादशी से चतुर्दशी |
| 15वीं तिथि | 🌕 पूर्णिमा | 🌑 अमावस्या |
🌟 27 नक्षत्रों के नाम
आकाश मंडल को ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों में बांटा गया है, जो इस प्रकार हैं:
1 अश्विनी, 2 भरणी, 3 कृत्तिका, 4 रोहिणी, 5 मृगशिरा, 6 आर्द्रा, 7 पुनर्वसु, 8 पुष्य, 9 अश्लेषा, 10 मघा,11 पूर्वा फाल्गुनी, 12 उत्तरा फाल्गुनी, 13 हस्त, 14 चित्रा, 15 स्वाति, 16 विशाखा, 17 अनुराधा, 18 ज्येष्ठा,19 मूल, 20 पूर्वाषाढ़ा, 21 उत्तराषाढ़ा, 22 श्रवण, 23 धनिष्ठा, 24 शतभिषा, 25 पूर्वाभाद्रपद,26 उत्तराभाद्रपद, 27 रेवती.
📅 पंचांग अनुसार मुहूर्त एवं पूजन
क्या आप अपनी कुंडली या विशेष तिथि के अनुसार ग्रह शांति, अभिषेक या दोष निवारण पूजा करवाना चाहते हैं?
आपका पसंदीदा हिंदी महीना या ऋतु कौन सी है? कमेंट में जरूर बताएं!
॥ सनातन धर्मो विजयते ॥

2 Comments
Jai Shree Ram
ReplyDeleteOm Namah Shivaya
ReplyDeleteॐ नमः शिवाय