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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग दर्शन का समय, इतिहास और यात्रा गाइड 2026 | Bhimashankar Jyotirlinga Guide

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर महाराष्ट्र का भव्य दृश्य और नागर वास्तुकला शैली

🕉️ भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग 🕉️
षष्ठम ज्योतिर्लिंग | सह्याद्रि की पावन गोद में

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में छठे स्थान पर सुशोभित है। महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित यह मंदिर न केवल एक अध्यात्मिक केंद्र है, बल्कि यह भीमा नदी का उद्गम स्थल और अपनी अद्वितीय नागर शैली की वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

📊 भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग: मुख्य तथ्य (Quick Facts)

विवरण जानकारी
📍 स्थान भोरगिरी, खेड़ तालुका, पुणे, महाराष्ट्र
🏛️ वास्तुकला नागर शैली (प्राचीन और आधुनिक का संगम)
🌊 प्रमुख नदी भीमा नदी (चंद्रभागा)

🗓️ दर्शन और आरती का समय | Darshan & Aarti

विवरण समय
नित्य दर्शन सुबह 04:30 – रात 09:30
नित्य आरती सुबह 05:00, दोपहर 12:00, शाम 07:30

📜 पौराणिक कथा एवं इतिहास | History

शिव पुराण के अनुसार, यह कथा त्रेतायुग के राक्षस कुंभकर्ण के पुत्र भीम से जुड़ी है। भीम का जन्म कुंभकर्ण की मृत्यु के बाद हुआ था, इसलिए वह अपने पिता के वध का प्रतिशोध लेना चाहता था। अपनी माता कर्कटी से पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर भीम क्रोधित हो उठा और उसने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या करके अजेय होने का वरदान प्राप्त कर लिया

शक्ति के अहंकार में चूर होकर भीम ने देवताओं को हराना और ऋषियों के यज्ञों को नष्ट करना शुरू कर दिया। उसने कामरूप देश के परम शिव भक्त राजा सुदक्षिण को युद्ध में हराकर बंदी बना लिया। जेल में होने के बावजूद राजा सुदक्षिण ने मिट्टी का शिवलिंग बनाकर महादेव की भक्ति जारी रखी जब भीम को यह पता चला, तो उसने क्रोध में आकर अपनी तलवार से उस शिवलिंग पर प्रहार किया

जैसे ही भीम ने शिवलिंग को नष्ट करना चाहा, महादेव स्वयं वहां प्रकट हुए और उन्होंने अपनी हुंकार मात्र से भीम और उसकी राक्षसी सेना को भस्म कर दिया । जिस स्थान पर यह युद्ध हुआ और जहाँ महादेव प्रकट हुए, वहां देवताओं ने उनसे लोक कल्याण के लिए सदा निवास करने की प्रार्थना की। उनकी विनती स्वीकार कर शिव जी वहां ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए, जिसे आज हम 'भीमाशंकर' के नाम से पूजते हैं

🕉️ भीमाशंकर और अर्धनारीश्वर की कथा | Sanatan Sankalp #Bhimashankar

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भीमाशंकर के इसी पावन क्षेत्र में भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध करने के बाद विश्राम किया था। उस समय माता पार्वती और महादेव के बीच सृष्टि के सृजन और शक्ति के महत्व पर चर्चा हुई।

कहा जाता है कि इसी स्थान पर महादेव ने माता पार्वती को अपने शरीर का आधा हिस्सा देकर 'अर्धनारीश्वर' रूप धारण किया था। यह स्वरूप इस बात का प्रतीक है कि शिव (पुरुष) और शक्ति (प्रकृति) एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। भीमाशंकर मंदिर के पास ही 'कमलजा देवी' का मंदिर है, जिन्हें माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि जब शिव जी त्रिपुरासुर से युद्ध कर रहे थे, तब ब्रह्मा जी ने उन्हें कमल के फूलों से पूजा था, जिससे माँ कमलजा प्रकट हुईं।

आज भी श्रद्धालु भीमाशंकर में महादेव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन के साथ-साथ शक्ति स्वरूपा माता कमलजा के दर्शन करते हैं, जो इस पूर्णता (अर्धनारीश्वर भाव) को दर्शाता है।

🚩 भीमाशंकर के आस-पास दर्शनीय स्थल

  • गुप्त भीमाशंकर: जंगल के बीच स्थित स्थान जहाँ शिवलिंग का प्राकृतिक अभिषेक होता है।
  • हनुमान झील: मंदिर से थोड़ी दूरी पर स्थित एक शांत और मनमोहक झील।
  • अंजनी माता मंदिर: मुख्य मंदिर से कुछ दूरी पर माता अंजनी का मंदिर स्थित है।
  • भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य: प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग और शेकरू (विशाल गिलहरी) का घर।
भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य

🚗 कैसे पहुँचें? (Travel Guide)

🛤️ रेल मार्ग निकटतम रेलवे स्टेशन पुणे (110 किमी) और कर्जत हैं।
🛣️ सड़क मार्ग पुणे और मुंबई से नियमित बसें और निजी टैक्सी उपलब्ध हैं।

"यो देवोऽसुरनाशाय भीमाशंकर विग्रह:।
तं नमामि महादेवं शिवं भुक्तिमुक्तिप्रदम् ॥"

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॥ ॐ नमः शिवाय ॥

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