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श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग दर्शन का समय, इतिहास और यात्रा गाइड 2026 | Shri Mallikarjuna Jyotirlinga Guide

Sri Mallikarjuna Jyotirlinga Srisailam Temple Andhra Pradesh

🔱 श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग 🔱

शिव–शक्ति का दिव्य संगम | श्रीशैलम पर्वत

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में द्वितीय स्थान पर आता है। यह आंध्र प्रदेश के कुर्नूल जिले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है। इसे "दक्षिण का कैलाश" भी कहा जाता है।

विशेष तथ्य:
यह स्थान न केवल एक ज्योतिर्लिंग है, बल्कि माता सती के 51 शक्तिपीठों (भ्रामराम्बा देवी) में से भी एक है। यहाँ शिव और शक्ति एक साथ निवास करते हैं।

📊 मंदिर की मुख्य जानकारी (Quick Facts)

विवरण जानकारी
📍 स्थानश्रीशैलम, आंध्र प्रदेश
🏛️ मुख्य देवताश्री मल्लिकार्जुन स्वामी एवं देवी भ्रामराम्बा
🌊 पवित्र नदीपातालगंगा (कृष्णा नदी)
⏰ दर्शन समयप्रातः 4:30 AM से रात्रि 10:00 PM

🗓️ दर्शन और आरती का समय | Mallikarjuna Darshan & Aarti Timings

विवरण (Activity) समय (Time)
मंदिर के कपाट (खुलना) प्रातः 04:30 बजे
सर्वदर्शन (General Darshan) सुबह 06:00 – दोपहर 03:30
अभिषेकम और विशेष पूजा सुबह 06:30 – दोपहर 01:00
संध्या दर्शन शाम 06:00 – रात 10:00
एकांत सेवा (कपाट बंद) रात 10:00 बजे

📜 पौराणिक कथा एवं इतिहास

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव, माता पार्वती और उनके पुत्र भगवान कार्तिकेय से गहराई से जुड़ी हुई है। पुराणों के अनुसार एक बार भगवान शिव के दोनों पुत्रों—कार्तिकेय और गणेश—के बीच यह प्रश्न उठा कि उनमें से कौन श्रेष्ठ है। इस विषय में निर्णय के लिए भगवान शिव ने एक प्रतियोगिता रखी कि जो पहले संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लौट आएगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा। भगवान कार्तिकेय तुरंत अपने वाहन मयूर पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा हेतु निकल पड़े, जबकि भगवान गणेश ने अपने माता-पिता शिव-पार्वती की सात बार परिक्रमा कर उन्हें ही संपूर्ण सृष्टि का स्वरूप मानते हुए प्रतियोगिता जीत ली। 

जब भगवान कार्तिकेय लौटे और यह जाना कि गणेश विजयी घोषित किए जा चुके हैं, तो वे अत्यंत दुःखी और क्रोधित हो गए। अपने अपमान और पीड़ा के कारण उन्होंने कैलास त्याग दिया और दक्षिण भारत के श्रीशैल पर्वत पर जाकर कठोर तपस्या करने लगे। पुत्र के वियोग से व्याकुल भगवान शिव और माता पार्वती स्वयं श्रीशैल पर्वत पर पहुँचे और कार्तिकेय को समझाने का प्रयास किया। पुत्र के प्रति अपने असीम प्रेम और करुणा के कारण भगवान शिव उसी स्थान पर मल्लिकार्जुन रूप में ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए, जबकि माता पार्वती वहाँ भ्रामराम्बा देवी के रूप में प्रतिष्ठित हुईं।

यह कथा इस ज्योतिर्लिंग को विशेष बनाती है, क्योंकि यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहाँ भगवान शिव और माता शक्ति दोनों एक साथ विराजमान हैं। “मल्लि” का अर्थ है पार्वती और “अर्जुन” शिव का प्रतीक माना जाता है, इस प्रकार मल्लिकार्जुन का अर्थ हुआ—शिव और शक्ति का दिव्य मिलन। यही कारण है कि श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग न केवल शिवभक्तों बल्कि शक्तिपीठों में भी अत्यंत पूजनीय है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से पारिवारिक कलह, अहंकार और मनोवैज्ञानिक पीड़ा का नाश होता है तथा भक्त को शिव-कृपा और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।

🚩 श्रीशैलम के प्रमुख दर्शनीय स्थल

  • भ्रामराम्बा देवी मंदिर: मुख्य परिसर में स्थित 18 महाशक्तिपीठों में से एक।
  • पातालगंगा: कृष्णा नदी का वह हिस्सा जहाँ भक्त पवित्र स्नान करते हैं।
  • साक्षी गणपति मंदिर: जो भक्तों की यात्रा का 'साक्ष्य' रखते हैं।
  • शिखरेश्वरम: श्रीशैलम का सबसे ऊँचा बिंदु।

🗓️ 2 दिनों का यात्रा कार्यक्रम | Itinerary

दिन 1होटल चेक-इन, पातालगंगा स्नान, रोप-वे आनंद और शाम को मुख्य ज्योतिर्लिंग दर्शन एवं आरती।
दिन 2शक्तिपीठ दर्शन, साक्षी गणपति, श्रीशैलम बांध और शिखरेश्वरम के दर्शन कर यात्रा संपन्न करें।

🚗 कैसे पहुँचें? (Travel Guide)

🛤️ रेल मार्गनिकटतम रेलवे स्टेशन मार्कापुर रोड (85 किमी) है।
🛣️ सड़क मार्गहैदराबाद (230 किमी) से सीधी बसें उपलब्ध हैं।

"श्रीशैल शृङ्गे विहितावतारं श्री मल्लिकार्जुनमिदं नमामि ।
भक्तानुकम्पाय सदा विराजं तं मल्लिकार्जुनं शरणं प्रपद्ये ॥"

क्या आप श्रीशैलम यात्रा की योजना बना रहे हैं?

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॥ हर हर महादेव ॥

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ॐ नमः शिवाय