महाराष्ट्र का सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल, जहाँ भक्त पुंडलिक की भक्ति में लीन हुए भगवान विठ्ठल
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित पंढरपुर हिंदुओं, विशेषकर वारकरी संप्रदाय के भक्तों के लिए एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है। यह भगवान विठ्ठल (भगवान कृष्ण का एक रूप) और देवी रुक्मिणी का निवास स्थान है। पंढरपुर की यात्रा मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है जो भक्ति, प्रेम और शांति से भरा है।
🌿 पंढरपुर की पौराणिक कथा: संत पुंडलिक की भक्ति
पंढरपुर की कहानी संत पुंडलिक की अटूट भक्ति से जुड़ी है। माना जाता है कि पुंडलिक एक माता-पिता भक्त थे, जो अपने माता-पिता की सेवा में लीन रहते थे। एक बार भगवान कृष्ण (विठ्ठल के रूप में) स्वयं उनसे मिलने आए। उस समय पुंडलिक अपने माता-पिता की सेवा कर रहे थे। उन्होंने भगवान को एक ईंट पर खड़े होने का संकेत दिया और कहा कि वे अपनी सेवा समाप्त करने के बाद उनसे मिलेंगे। भगवान विठ्ठल ने पुंडलिक की भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी आज्ञा का पालन किया और उसी ईंट पर खड़े होकर उनकी प्रतीक्षा करते रहे। यही कारण है कि पंढरपुर में भगवान विठ्ठल की मूर्ति कमर पर हाथ रखे, ईंट पर खड़ी हुई मुद्रा में है। पुंडलिक की भक्ति ने भगवान को वहाँ सदैव के लिए स्थापित कर दिया।
यह घटना दर्शाती है कि सच्ची भक्ति किसी भी दिखावे से बढ़कर है और माता-पिता की सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।
🏞️ चंद्रभागा नदी (भीमा नदी) का महत्व
पंढरपुर चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित है, जो वास्तव में कृष्णा नदी की सहायक नदी भीमा का एक अर्धचंद्राकार मोड़ है। इसी घुमाव के कारण इसे 'चंद्रभागा' कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'चंद्रमा के आकार की' नदी। भक्तों का मानना है कि इस पवित्र नदी में डुबकी लगाने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आषाढ़ी एकादशी और कार्तिकी एकादशी के दौरान, लाखों वारकरी भक्त यहाँ स्नान करने के बाद भगवान विठ्ठल के दर्शन के लिए मंदिर की ओर बढ़ते हैं।
📍 पंढरपुर के आस-पास घूमने लायक जगहें
- श्री विठ्ठल रुक्मिणी मंदिर: यह पंढरपुर का मुख्य आकर्षण है, जहाँ भगवान विठ्ठल और रुक्मिणी देवी की मूर्तियाँ विराजमान हैं।
- पुंडलिक मंदिर: चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर संत पुंडलिक को समर्पित है।
- संत चोखामेला समाधि: मंदिर के प्रवेश द्वार के पास ही संत चोखामेला की समाधि है, जो वारकरी परंपरा के एक महान संत थे।
- एकनाथ महाराज मंदिर: यह मंदिर महान संत एकनाथ को समर्पित है।
- इस्कॉन मंदिर (श्री राधा पंढरिनाथ मंदिर): पंढरपुर में एक सुंदर इस्कॉन मंदिर भी है जहाँ आप दर्शन कर सकते हैं।
- नामदेव पायरी (सीढ़ी): मंदिर में प्रवेश करते ही एक सीढ़ी पर संत नामदेव का नाम खुदा हुआ है, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली थी।
🚌 कैसे पहुंचें पंढरपुर? (मुंबई से दूरी)
पंढरपुर महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है: Sanatansankalp.in
- मुंबई से दूरी: पंढरपुर मुंबई से लगभग 360-370 किलोमीटर दूर है। सड़क मार्ग से यात्रा करने में लगभग 7-8 घंटे लगते हैं।
- पुणे से दूरी: पुणे से पंढरपुर की दूरी लगभग 210 किलोमीटर है, जिसमें 4-5 घंटे का समय लगता है।
- निकटतम हवाई अड्डा: पुणे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (PNQ) है, जो पंढरपुर से लगभग 210 किमी दूर है।
- निकटतम रेलवे स्टेशन: पंढरपुर का अपना रेलवे स्टेशन है, जो महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
- सड़क मार्ग: महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की बसें मुंबई, पुणे, सोलापुर और अन्य शहरों से नियमित रूप से उपलब्ध हैं।
🏨 पंढरपुर में ठहरने के विकल्प (Stay Options)
पंढरपुर में भक्तों और पर्यटकों के लिए विभिन्न प्रकार के ठहरने के विकल्प उपलब्ध हैं:
- धार्मिक गेस्ट हाउस/भक्त निवास: कई मंदिर ट्रस्ट और धार्मिक संगठन भक्तों के लिए किफायती और स्वच्छ आवास प्रदान करते हैं। यह सबसे लोकप्रिय विकल्प है।
- होटल और लॉज: शहर में बजट से लेकर मध्यम श्रेणी के कई निजी होटल और लॉज भी उपलब्ध हैं। आप ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल्स पर इन्हें ढूंढ सकते हैं।
- धर्मशालाएं: कुछ धर्मशालाएं भी हैं जो भक्तों को न्यूनतम शुल्क पर आवास प्रदान करती हैं।
विशेषकर आषाढ़ी और कार्तिकी एकादशी के दौरान आवास पहले से बुक करना उचित रहता है, क्योंकि इस समय भारी भीड़ होती है।
🙏 आपके विचार : Sanatan Sankalp
"क्या आपने कभी पंढरपुर की यात्रा की है? भगवान विठ्ठल के दर्शन का आपका अनुभव कैसा रहा? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार और अनुभव जरूर साझा करें! जय जय विठ्ठल, हरि विठ्ठल!"
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